दिल्ली सरकार ने शहर की हवा को जहरीले धुएं से मुक्त करने और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपनी नई 'इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026-2030' का खाका तैयार कर लिया है। यह दूरदर्शी नीति न केवल राजधानी में ईवी (EV) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बल्कि पेट्रोल-डीजल वाहनों से होने वाले 23% उत्सर्जन को कम करने में भी निर्णायक साबित होगी।
सब्सिडी और प्रोत्साहन का नया मॉडल नई नीति के तहत, सरकार ने उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सीधे बैंक खाते (DBT) के माध्यम से वित्तीय सहायता देने की योजना बनाई है। दोपहिया वाहनों पर पहले वर्ष ₹30,000 तक की सब्सिडी मिलेगी, जबकि ई-ऑटो और छोटे इलेक्ट्रिक ट्रकों (N1) के लिए क्रमशः ₹50,000 और ₹1 लाख तक की राहत दी जाएगी। विशेष रूप से, पुरानी बीएस-IV गाड़ियों को स्क्रैप करने पर ₹1 लाख तक का 'स्क्रैपिंग इंसेंटिव' भी प्रदान किया जाएगा, जो पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने की प्रक्रिया को तेज करेगा।
टैक्स छूट और चार्जिंग नेटवर्क नीति की सबसे बड़ी राहत ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों के लिए है, जिन्हें रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट मिलेगी। चार्जिंग की समस्या को हल करने के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है, जो बैटरी स्वैपिंग और पब्लिक चार्जिंग पॉइंट्स के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करेगी। हर डीलरशिप पर अब कम से कम एक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन होना अनिवार्य होगा।
भविष्य की समयसीमा और डिजिटल पोर्टल सरकार ने स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है: 1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और 1 अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का ही पंजीकरण होगा। इसके अलावा, स्कूल बसों और सरकारी विभागों में भी ईवी की भागीदारी को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य बनाया गया है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक 'सिंगल विंडो' डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिससे सब्सिडी और लाइसेंस की प्रक्रिया पेपरलेस हो सकेगी।