अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों टैरिफ विवादों के साथ-साथ वैश्विक कूटनीति के एक और बड़े मोर्चे—रूस-यूक्रेन युद्ध—को सुलझाने में भी लगे हुए हैं। हाल ही में उन्होंने इस युद्ध को रोकने के प्रयास में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से व्यक्तिगत मुलाकातें कीं। इन बैठकों को लेकर उम्मीद की जा रही थी कि शायद युद्धविराम की दिशा में कोई सकारात्मक संकेत मिलेगा, लेकिन ताजा घटनाक्रमों से साफ हो गया है कि ट्रंप की ये कोशिशें फिलहाल असफल रही हैं।
ट्रंप के प्रयासों के बावजूद, रूस ने बुधवार रात यूक्रेन की राजधानी कीव पर एक भीषण हमला किया, जिसमें 19 लोगों की जान चली गई, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे। इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद जमीनी हालात बेहद भयावह बने हुए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "ट्रंप इस हमले से बहुत दुखी हैं, लेकिन उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई। वह पहले ही समझ चुके थे कि पुतिन फिलहाल पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।"
ट्रंप ने पुतिन के साथ अपनी बैठक को सफल बताया था, लेकिन हमले के बाद उनकी नाराजगी साफ तौर पर झलक रही है। कैरोलिन लेविट ने यह भी कहा कि ट्रंप युद्ध को खत्म होते देखना चाहते हैं और वह लगातार इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जिस प्रकार से रूस ने हमले को अंजाम दिया, उससे उनकी उम्मीदों को झटका लगा है।
एक अन्य बड़ी जानकारी यह सामने आई है कि जिस बहुप्रतीक्षित बैठक की योजना पुतिन और जेलेंस्की के बीच बनाई जा रही थी, वह अब नहीं होगी। जर्मनी के चांसलर ने बयान जारी कर कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए अब यह स्पष्ट है कि दोनों नेताओं के बीच शांति वार्ता संभव नहीं है। इसका मतलब यह है कि ट्रंप की मध्यस्थता के प्रयासों को एक और झटका लगा है।
रूस के इस हमले में यूक्रेनी सैन्य ठिकानों को लंबी दूरी की मिसाइलों से निशाना बनाया गया, जिससे यूक्रेनी सुरक्षा प्रणाली को बड़ा नुकसान हुआ है। इस हमले के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ट्रंप की कूटनीतिक कोशिशें व्यावहारिक रूप से सफल हो सकती हैं या नहीं।
इस पूरी स्थिति में ट्रंप की भूमिका एक जटिल मोड़ पर है। एक तरफ वे अमेरिका के व्यापारिक हितों को लेकर दुनिया भर से टकरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे युद्ध को खत्म करने की पहल कर रहे हैं। लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच जिस स्तर की कटुता और अविश्वास है, उसमें ट्रंप की कोशिशें अभी तक नतीजा नहीं दे पा रही हैं।
आखिरकार, यह साफ होता जा रहा है कि युद्ध रोकने के लिए सिर्फ राजनीतिक इच्छाशक्ति ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट प्रयास और ठोस रणनीति की जरूरत है। ट्रंप की व्यक्तिगत पहलें सराहनीय हो सकती हैं, लेकिन इस युद्ध को थामने के लिए वैश्विक दबाव और सामूहिक संवाद ज़रूरी है।